एक हाथ चायदानी पकड़े हुए चाय के कप में गर्म चाय डाल रहा है — यही है भारत की पहचान, जहाँ चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बन चुकी है।
ब्रिटिश शासन ने चाय को भारत में लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। हालाँकि असम के कुछ हिस्सों में लोग हज़ारों सालों से चाय पीते आए थे, लेकिन पूरे देश में इसका प्रसार 19वीं सदी के दौरान हुआ।
भारत में चाय की शुरुआत
17वीं शताब्दी में अंग्रेजों ने चीन से चाय का स्वाद चखा, और धीरे-धीरे इसे अपनी रोज़मर्रा की आदत बना लिया। 1858 में जब ब्रिटिश राज की शुरुआत हुई, उन्होंने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए चाय के पौधे भारत लाने शुरू किए। जलवायु और मिट्टी के लिहाज़ से भारत चाय के लिए अनुकूल साबित हुआ — खासकर असम, दार्जिलिंग और नीलगिरी जैसे क्षेत्र।
असम — भारत की मज़बूत काली चाय
असम की चाय अपने गाढ़े “माल्टी” स्वाद के लिए जानी जाती है। यहाँ का गर्म और आर्द्र मौसम चाय की खेती के लिए आदर्श है। आज असम भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक क्षेत्र है और अंग्रेज़ी ब्रेकफास्ट टी से लेकर मसाला चाय तक में इसका इस्तेमाल होता है।
दार्जिलिंग — चाय की शैम्पेन
असम की चाय अपने गाढ़े माल्टी स्वाद के लिए जानी जाती है। दार्जिलिंग की चाय चीन की कैमेलिया साइनेंसिस किस्म से आती है। इसका हल्का, सुगंधित स्वाद और मस्कट जैसी खुशबू इसे बाकी चायों से अलग बनाती है। फर्स्ट फ्लश और “सेकंड फ्लश” जैसी श्रेणियों में मिलने वाली यह चाय दुनिया भर में चाय प्रेमियों की पसंद है।
मसाला चाय — भारत की पहचान
भारत में चाय का असली स्वाद मसाला चाय में बसता है। दूध, अदरक, इलायची, दालचीनी और लौंग का मेल इसे खास बनाता है। कभी महंगी चाय पत्तियों को बचाने के लिए बनाई गई यह रेसिपी आज भारत की नेशनल ड्रिंक बन चुकी है।
सीलोन — श्रीलंका की सुगंधित सौगात
श्रीलंका में ब्रिटिश काल में शुरू हुई चाय खेती अब विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ की सीलोन चाय अपनी खुशबू और हल्के चॉकलेटी स्वाद के लिए जानी जाती है। ऊँचाई और मौसम के फर्क से यहाँ की हर चाय का स्वाद अलग होता है।